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Utho Bharat Prayojana: A Dramatical Change in School Education.

उठो भारत प्रयोजना -एक परिचय :- हम जानते है कि वर्तमान में शिक्षा एक ढर्रें के रूप में चल रही है | हम छात्रों को पढ़ने के लिए इसलिए भेज रहे है क्योंकि सभी लोग बच्चों को पढ़ा रहे है | हमें यह ज्ञात नहीं है कि बच्चों को किस लक्ष्य से विद्यालय भेज रहे है | पढाई के पहले अभिभावक तथा शिक्षक बच्चों के लिए कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं करते है | बच्चे में अच्छा खिलाडी बनने की योग्यता है परन्तु इसे कोई नहीं देखता | केवल पारंपरिक शिक्षा दी जाती है पर इसके साथ उसे खिलाडी बनने का कोई अवसर नहीं दिया जाता | छात्र में वक्ता, मैकेनिक, प्रबंधक, वैज्ञानिक बनने की योग्यता हो सकती है परन्तु इसके लिए कोई जाँच-पड़ताल-परीक्षण नहीं किया जाता | केवल वहीं पारंपरिक शिक्षा की पुस्तकें पढ़ने को दे दी जाती है | छात्र में छुपी हुई क्षमता को प्रकट कर उसके अनुसार लक्ष्य परक शिक्षा का प्रशिक्षण बिलकुल ही नहीं दिया जाता |

छात्र केवल स्कूल जा रहा है और उसका भविष्य का निर्धारण एक हवाई झौंके के साथ जुड़ा हुआ है जिधर झौंका आया-चल पड़ें | पडौसी का पुत्र या पुत्री जो कर रहा है, सहपाठी जो कर रहे है आज उसी के देखा देखी छात्र कर रहे है | आज रूटीन यह है कि किसी ने कुछ सलाह दे दी- बस छात्र उसी प्रवाह में अपने केरियर को बनाने की कोशिश में लग जाता है | बिना क्षमता, योग्यता या प्रशिक्षण के जो भी हाथ लग गया छात्र द्वारा उसी पाठ्यक्रम में सर खपाना- असफल होकर बेरोजगार बन जाना यही परंपरा बन गई है |

प्रकृति प्रत्येक बालक को कोई न कोई विशेष योग्यता देकर जन्म देती है | आवश्यकता है इस योग्यता को जांच कर तदनुसार उसके लिये शिक्षा की व्यवस्था करना | यदि सही समय पर सही दिशा में सही मार्गदर्शन द्वारा तीर छोड़ा जाता है तो लक्ष्य वेध होने में कभी संदेह नहीं रहता | इस परिस्थिति पर चिंतन करके स्वामी विवेकानंद की जयंती के तहत युवा दिवस पर ग्रामोदय शिक्षण संस्थान ने आज “उठो भारत प्रयोजना” की उद्घोष किया | “उठो भारत प्रयोजना” द्वारा उक्त बिन्दुओं को ध्यान में रखकर “लक्ष्य परक” शिक्षा का शुभारम्भ किया जायेगा | विषय विशेषज्ञों, मनोवैज्ञानिकों परीक्षणों एवं गतिविधि आधारित मूल्यांकन द्वारा छात्र की रुचि एवं क्षमता के आधार पर लक्ष्य तय किया जायेगा और तदनुसार पारंपरिक शिक्षा के साथ उस विशेष विषय का गहराई से प्रशिक्षण दिया जायेगा | “उठो भारत प्रयोजना” के लिए छात्र का चयन प्रतियोगी परीक्षा, साक्षात्कार एवं स्वास्थ्य परीक्षण के आधार पर किया जायेगा | प्रत्येक कक्षा में छात्रों की संख्या सीमित होगी जो 20-30 विद्यार्थी के बीच होगी| पाठ्यक्रम पूर्णतः आवासीय होगा | “उठो भारत प्रयोजना” के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टाफ एवं अन्य व्यवस्थाओं का कार्य चल रहा है | इसके अतिरिक्त वर्ष भर शिक्षा, प्रबंधन, मनोविज्ञान, विज्ञान से जुड़े भिन्न-भिन्न विशेषज्ञों से विचार विमर्श, सेमीनार, गोष्ठियां आयोजित की जायेगी| “उठो भारत प्रयोजना” के अंतर्गत प्रवेश लेने वाले छात्रों का रजिस्ट्रेशन 1 जून 2015 से शुरू हो गया है | इस प्रयोजना के संचालन के लिए टीम भी गठित हो गई है | “उठो भारत प्रयोजना” के अंतर्गत अध्ययन का कार्य अगले शिक्षा सत्र में शुरू हो जायेगा |

इस प्रयोजन में खेल, संगीत, चित्रकला, कौशल विकास, कंप्यूटर प्रशिक्षण, भाषण कला, लेखन कौशल आदि को भी पाठ्यक्रम में स्थान देकर इनका पूर्ण प्रशिक्षण दिया जाना प्रस्तावित है| साथ ही हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत भाषा का पढ़ना, लिखना और बोलने का भी पर्याप्त अभ्यास करवाया जायेगा | छात्र का प्रारम्भ से ही लक्ष्य निर्धारित होने से उसकी योग्यता के अनुसार साहित्यकार, पत्रकार, प्रशासक, वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजिनियर, खिलाडी-धावक, व्यवसायी, शिक्षक, वक्ता, कलाकार, मनोवैज्ञानिक, चिन्तक, पायलट, मेकेनिक या और बहुत से क्षेत्रों के लिए छात्र को तैयार किया जा सकेगा | पढाई का तात्पर्य केवल प्रमाण पत्र या डिग्री लेने तक सीमित हो गया है | “उठो भारत प्रयोजना” इससे हटकर छात्र को राष्ट्र के कर्णधार के रूप में तैयार करने का प्रयास है जिससे देश को प्रतिभा संपन्न ऐसे युवा उपलब्ध हो सके जो भारत का भविष्य गढ़ने में सक्षम हो |

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